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Dec 12, 2019
लोग नहीं ये मौके हैं
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लोग नहीं ये मौके हैं - सुधा राजे झुक मत सीना तान उठा सर , क्या जो कर-पग छाले हैं। चौकन्ना हो देख हर तरफ कितने चेहरे काले हैं। ...
Nov 17, 2018
..जलता रहा
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...जलता रहा ऋतु कौशिक अश्क़ अपने , आप ही पीता रहा दरिया मेरी आँख में ठहरा रहा धूप मेरा जिस्म पिघलाती रही और साया देख ...
Sep 15, 2017
दो ग़ज़लें
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कश्ती माँझी की... - डॉ. जया ' नर्गिस ’ 1 कायदे हैं अजब तेरे घर के मोम के होंठ , बोल पत्थर के कश्ती माँझी की भूल से डूब...
Mar 10, 2017
नारी का संसार लिखा
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नारी का संसार लिखा -डॉ. पूर्णिमा राय स्वप्न सलोने मन में लेकर , दिलबर तेरा प्यार लिखा। यौवन तेरे नाम किया है , तन-मन का शृंगा...
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Feb 19, 2017
दो ग़ज़लें
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अपना बना लिया - आशीष दशोत्तर उतर के सबके दिलों में उसने सभी को अपना बना ल...
Jan 28, 2017
तीन ग़ज़लें
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1. हरी छाँव भी है - सुधेश जिन्दगी धूप है छाँव भी है शहर से ऊबे तो गाँव भी है। ...
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May 10, 2016
दो ग़ज़लें
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उनकी आँखों में - डॉ.ब्रह्मजीत गौतम (1) उन की आँखों में ऐसी तासीर है जो देखे सँवरे उसकी तक़दीर है कहते हैं...
Aug 12, 2015
ग़ज़लें
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- गिरीश पंकज 1. अंगार लिखता है कोई तकरार लिखता है कोई इनकार लिखता है हमारा मन बड़ा पागल हमेशा प्यार लिखता है वे अपनी खोल ...
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Oct 20, 2014
दो ग़ज़लें
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दियों की बात - डॉ.राकेश जोशी 1. आज फिर से भूख की और रोटियों की बात हो खेत से रूठे हुए सब मोतियों की बात हो जिनसे तय था ये ...
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