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सुरेश ऋतुपर्ण
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Aug 1, 2024
कविताः चलती है हवा
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- सुरेश ऋतुपर्ण चलती है हवा तो हो जाती है बरसात पानी की बूँदों की तरह पत्तियों पर पत्तियाँ झर रहीं हैं चुपचाप ! थर-थर काँपती घाटी बेसुध हो...
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