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Jun 1, 2022

कविताः मैं वही पेड़ हूँ

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- डॉ. विभा रंजन (कनक) मैं वही पेड़ हूँ.. जब तुम्हारी माँ को.. सवारी नहीं मिली.. यहीं ठहर.. आगे बढ़ी थी.. आज तुम मुझे.. काटने आ...
Sep 3, 2021

लघुकथा- जहाँ जागे वहीं सवेरा

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- डॉ. विभा रंजन (कनक) जानकी का दर्द जब असहनीय हो गया , तब उसने अपनी बहू श्वेता को आवाज दी। ‘ आपने बुलाया मम्मी जी.! ’ ‘हाँ, मेरे घुटने ...
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  • डॉ. रत्ना वर्मा
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