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Jul 1, 2026
दो कविताएँः
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- गुंजन अग्रवाल ‘अनहद’ 1. उर्मिला हूँ मैं तुम्हारी वेदना सहती रहूँगी। शब्द न मुख से कहूँगी। मैं वधू हूँ राजकुल की। पंखुड़ी हूँ खास गुल क...
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दो लघुकथाएँः
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- आनंद हर्षुल 1- ईश्वर की खाँसी ईश्वर खाँस रहा है और पृथ्वी हिल रही है। मनुष्य हजारों हजार बरसों से महसूस कर रहा है कि ईश्वर जब भ...
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लघुकथाः उजली दुनिया
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- अन्तरा करवडे “मम्मी, आज स्कूल से आऊँगी, तब तक मेरा वो सफेद फ्रॉक तैयार रखना।” “सफेद फ्रॉक? वो नीली लेस वाला?” मैंने जान बूझकर “नीली लेस” ...
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किताबेंः अनादि समर : छावा के बलिदान से जाग उठा हिन्दू
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- डॉ. लोकेन्द्र सिंह पुस्तक : अनादि समर, लेखक : गिरीश अवधूत जोशी, प्रकाशक : अर्चना प्रकाशन, भोपाल, मूल्य : 80 रुपये लेखक गिरीश जोशी की पु...
कविताः कुछ और...
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- रमेश कुमार सोनी लोगों की दुनिया आज सिमटी हुई है- दड़बों जैसे फ्लैटनुमा मकानों में जहाँ से उसकी दौड़ कार्यालयों तक में खप जाती है संचार उ...
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