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Nov 2, 2025
कथाः फैसला
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- पूजा अग्निहोत्री मैं नीरव, अड़तीस वर्षीय एक सुदर्शन और सौम्य स्वभाव का प्रौढ़ पुरुष, आज अपने लिए लड़की देखकर आया हूँ। आठ साल पहले मेरी शा...
लघुकथाः सहानुभूति
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- सतीशराज पुष्करणा कहीं से स्थानान्तरण होकर आए नए-नए अधिकारी एवं वहाँ की वर्कशाप के एक कर्मचारी रामू दादा के मध्य अधिकारी के कार्यालय में ग...
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कविताः अपने आप से
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- विजय जोशी याद है उस दिन तुमने कहा था कि मन नहीं भरा आपका दुनिया से, जीवन से इस सारी उहापोह और उलझन से जो अब भी, करते हैं कविता जीवन में...
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प्रेरकः क्रोध का उपचार कैसे करें?
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- निशांत हमारे भीतर क्रोध तब उपजता है, जब हम स्वयं से तथा क्रोध उपजानेवाले दीर्घकालिक और तात्कालिक कारणों से अनभिज्ञ होते हैं। इस अनभिज्ञ...
लघुकथाः गुब्बारा
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- श्यामसुन्दर 'दीप्ति' गली में गुब्बारेवाला रोज गुजरता। वह बाहर खड़े बच्चे को गुब्बारा पकड़ा देता और बच्चा माँ-बाप को दिखाता। फिर ...
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