उदंती.com
(Move to ...)
Home
▼
Jun 1, 2025
कविताः गायब
›
- राजेश पाठक नदियाँ गायब गायब जंगल गायब हुआ पहाड़ हाथी की चिंघाड़ है गायब गायब सिंह दहाड़ धोती गायब गायब साड़ी गायब तन से लत्ता पत्तल पर स...
दो लघुकथाएँः
›
- सुदर्शन रत्नाकर 1.शुद्ध जात माँजी मेरे पास रहने के लिए आ रही थीं। उनको नहलाना- धुलाना, घुमाना, कपड़े लत्ते, खाना सब काम मुझे ही करने ह...
3 comments:
कविताः नशे का अँधेरा भविष्य
›
- डॉ. कविता भट्ट पहाड़ी गाँव की पगडंडी और नगर की गली में चलते हुए देखे मैंने- कुछ टूटी हुई शीशियाँ कुछ बोतलों के ढक्कन गहन चीत्कार कर उ...
लघुकथाः परिचय
›
- प्रगति गुप्ता “डॉक्टर साहिब शाम से पहले नहीं आ पाएँगे।... उन्हें अचानक किसी रिश्तेदार की तबीयत बिगड़ने से शहर के बाहर जाना पड़ा है। आपकी...
2 comments:
साहित्य मंथनः साहित्य के सरोकार को बड़ा फलक देती ‘सोंढूर- डायरी’
›
- विनोद साव इन्दुशंक र मनु भिलाई में व्याख्याता रहे हैं। वे तीन विषयों में एम.ए. हैं। वे साहित्य के बड़े अध्येता और साधक रहे हैं। कम लिखते...
‹
›
Home
View web version