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May 2, 2025
लघुकथाः बड़कऊ
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- रचना श्रीवास्तव पूरा घर दहाड़े मार -मारकर रो रहा था। अम्मा बार बार बेहोश हुए जा रहीं थीं। मीरा और सुन्दर पिता के पैर पकड़ पकड़ रो रह...
कविताः अम्मा का गुटका
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- भावना सक्सैना चाची और अब छोटी भाभी ने बड़ी सँभाल से रखा है मटमैली जिल्द और पीले पन्नों वाला रामायण का एक गुटका अम्मा का गुटका देख उसे अना...
ग़ज़लः तुम्हें राधा बुलाती है
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- अशोक शर्मा कभी तू मान जाती है, कभी तू रूठ जाती है, अज़ब हैं ख़ेल क़िस्मत का, हँसाती है, रुलाती है। अदा उसकी यही प्यारी मुझे हरदम लुभाती है...
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किताबेंः विचित्रता से घिरे मन और बुद्धि
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- रश्मि विभा त्रिपाठी मन विचित्र बुद्धि चरित्र (कहानी-संग्रह): डॉ. सुषमा गुप्ता, पृष्ठ: 208, मूल्य: 209 , संस्करण: 2025, प्रकाशक: हिंद य...
कविताः नमस्कार
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- रवींद्रनाथ टैगोर अनुवाद: मुरली चौधरी "अरे ओ नवयुवक, अरे मेरे बच्चे, अरे हरे-भरे, अरे अबोध, कोमल पत्तों की बहार प्रकाश के देश में तू...
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