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Jul 1, 2023
क्षणिकाएँः प्रेम
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- पारुल हर्ष बंसल 1 प्रेम कब आया कब गया इसका भान ही ना हुआ इसके पाँव में घुँघरू बँधे होने चाहिए 2 प्रेम को प्रेम ही रहने दो व्यापार के ल...
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कविताः यात्रा की थकान
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- रश्मि विभा त्रिपाठी भँवर में बुरी तरह से फँसने पर सर से पाँव तलक धँसने पर मेरी आँखों के गड्ढों में क्यों नहीं भरा एक बूँद भी जल ! सुनो...
किताबेंः आमजन की ग़ज़लें ‘दो मिसरों में’
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- डॉ. उपमा शर्मा पुस्तक : दो मिसरों में (ग़ज़ल-संग्रह): मनीष बादल, मूल्य: रु195, पृष्ठ:116, वर्ष: 2023, प्रकाशक: मंजुल पब्लिशिंग हाउस, सेक...
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प्रेरकः लौटा लाइए अपने भीतर का बचपन
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- निशांत कभी- कभी छत पर बनी सिंटेक्स की टंकी की हालत जाँचने के लिए ऊपर चढ़ना पड़ता है. इसमें दिक्कत यही है कि ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ नहीं ...
लेखकों की अजब गज़ब दुनियाःनियम बनाकर चलने वाले लेखक
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- सूरज प्रकाश • ई बी व्हाइट अपने लेखन के बारे में लिखते हैं कि मैं काम करते समय संगीत नहीं सुनता। मुझमें ध्यान देने का इतना माद्दा नही...
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