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Jun 1, 2023
कविताः 18 जून पितृ दिवस- पिताजी चले गए
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- प्रियदर्शी खैरा पिताजी चले गए और हम पिताजी हो गए अब बेटे जब हमसे आँख मिलाते हैं तो दीवार पर टँगे पिताजी मुस्कराते हैं कभी- कभी लगता...
कविताः 18 जून पितृ दिवस - पिता नहीं उफ़ करता है
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- पीयूष श्रीवास्तव सुबह- सवेरे घर से मेरे, एक कर्मठ राही निकलता है दिन भर धूप से लेता लोहा, सूरज के संग जलता है आ जाए बादल की गर्जन, या घिर...
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कविता- 18 जून पितृ दिवस- सपने में आते हैं पिता
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- सांत्वना श्रीकान्त पिता की ढीली-सी स्वेटर पहन मैं अब भी महसूस कर रही हूँ उन्हें, बिल्कुल नरम उनके अंतस जैसी, मानो हर धागे में गुँथा है...
लघुकथाः गुलाब के लिए
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- कस्तूरीलाल तागरा माली ने जैसे ही बगीचे में प्रवेश किया। कुछ पौधे उल्लास से तो कुछ तनाव से भर गए। माली ने अपनी खुर्पी सँभाली। गुलाब के पौध...
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लघुकथाः सीख
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- अंजलि गुप्ता ‘सिफ़र’ ‘छपाक ’, उसे थोड़ी ऊँचाई से गिराया गया । छोटे से, सुंदर से, पारदर्शी तालाब में जहाँ छोटे-छोटे प्लास्टिक के पेड़ उगे...
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