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Mar 1, 2022
कविता- मौन उद्गार
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सोनेट - अनिमा दास (कटक, ओड़िशा) मेरी आत्मा पर भी...मेरा अग्र अधिकार नहीं मेरा स्त्री होना क्या मात्र चिरंतन अभिशाप है? मेरा शिखर पर्यंत आना ...
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दोहे- फिर खिल उठा पलाश
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- डॉ. सुरंगमा यादव 1. अमराई यौवन भरी, कोयल भरे मिठास। हवा वसंती कह रही, आजा छोड़ प्रवास।। 2. फागुन आया मद भरा, मौसम हुआ हसीन। इठलाता य...
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कविता- उस दिन कहना...
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- शशि बंसल गोयल जिस दिन कह सको मन नहीं रसोई पकाने का सब सहमति दे दें उस दिन कहना - महिला दिवस जिस दिन सोच सको अकेले घूमने जाने का सब सहमति...
कविता- माह फागुनी
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- आशा पाण्डेय (कैंप अमरावती, महाराष्ट्र) रंग जामुनी, माह फागुनी, पूनम की सौगात । धूसर, धूमिल, लाल, हरे रंग, भीग रहा है गात । वन-प...
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कविता- मौसम है रंगीन सुहाना
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- प्रो.(डॉ.)रवीन्द्र नाथ ओझा मौसम है रंगीन सुहाना पुलकित मन है पुलकित गात आज प्रकृति संवरी कुछ ऐसी सृष्टि बनी मधुऋतु की रात। सपने सार...
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