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Nov 1, 2021
व्यंग्यः लक्ष्मी नहीं आई, आ गई महँगाई !
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- गिरीश पंकज दिवाली निकट थी , पर स्थिति बड़ी विकट थी। कारण यह कि हमारे जीवन का दिवाला पिटा हुआ था और हम दीवाल से सिर सटाकर यही सोच रहे थे क...
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रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' की दो कविताएँ
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1. दीपक माला इन दीपों से जलते झलमल , मेरे मन के गीत अधूरे। इन दीपों से जलते मेरे स्वप्न , हुए जो कभी न पूरे। केवल एक रात जल कर , बुझ ...
जीवन दर्शनः ईश्वर का हाथ : सदा रखें साथ
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- विजय जोशी ( पूर्व ग्रुप महाप्रबंधक , भेल , भोपाल (म. प्र.) जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि है मैं नाहि सब अंधियारा मिटी , जब दीपक द...
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छत्तीसगढ़ की दीवालीः लोक संस्कृति में ग्वालिन पूजा
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दीपावली पर्व की तैयारी तभी से दिखाई देने लगती है, जब कुम्हारों के घर चाक पर मिट्टी के दीये बनने शुरू हो जाते हैं। आपने देखा होगा, मिट्टी क...
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आलेखः बड़ा महत्त्वपूर्ण है शब्दों का चयन
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-डॉ. आशीष अग्रवाल शब्दों में कमाल की ऊर्जा होती है हमारे मुँह से बोले हुए शब्द हमारे व्यक्तित्व के बारे में बताते हैं। आपने अकसर कुछ ...
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