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Aug 1, 2021
चार कविताएँ
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-सुभाष नीरव 1. पढ़ना चाहता हूँ मैं पढ़ना चाहता हूँ एक अच्छी कविता। कविता कि जिसे पढ़कर खुल जाएँ बाहर-भीतर के किवाड़ मन का कोना-कोना गमकन...
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कहानी- पुराना मित्र
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-डॉ. कुँवर दिनेश सिंह बस अड्डा। मैं खड़ा इंतज़ार कर रहा था बस का। एक महाशय कहीं से आकर रुके। बार-बार घड़ी की ओर देख रहे थे। शायद उन्हें भी...
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व्यंग्य- आइए हाइजैक करें!
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- रामेश्वर काम्बोज ‘ हिमांशु ’ डरिए नहीं! हम प्लेन हाइजैक करने वाले उत्तर प्रदेश के भोलेनाथ पाण्डे और देवेन्द्र पाण्डे की बात नहीं कह रहे है...
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तीन हाइबन
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-अनिता मंडा 1. दीवार का मन दीवारों के बिना छत कैसे रहेगी इसी फ़िक्र में जर्जर दीवारें जी जान से खड़ी रहती है। भुरभुरी होकर बिखरने तक , अप...
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संस्मरण- गुज़ारिश
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-प्रीति गोविन्दराज ‘ आपसे एक गुज़ारिश थी, बस आज भर की बात है मैडम जी! आपको मालूम है मैंने आपसे कभी ऐसी कोई रिक्वेस्ट पहले नहीं की। ’ मैंन...
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