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Jun 12, 2009
श्रम की गरिमा का सम्मान
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श्रम की गरिमा का सम्मान 'श्रम सभ्यताओं की प्राण शक्ति है। यदि श्रम को उपेक्षित किया जाता है तो हर समाज में आलस्य का कैंसर पैदा हो जा...
इस अंक के रचनाकार
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अविनाश वाचस्पति 14 दिसंबर 1958 का जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से कला स्नातक। सभी साहित्यिक विधाओं में समान रूप से लेखन। व्यंग्य, कविता ए...
आत्मीय प्रस्तुति
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आत्मीय प्रस्तुति उदंती का नया अंक पढ़कर ख़ुशी हुई । हमेशा की तरह यह अंक भी अच्छी साज-सज्जा, बेहतर रचनाओं और आत्मीय प्रस्तुति के कारण दि...
तिनके नहीं मिलेंगे तब बाल ही काम आएँगे, उम्र को भूल जाइए...
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तिनके नहीं मिलेंगे तब बाल ही काम आएँगे चिडिय़ा अपना घोंसला बनाने के लिए तिनकों का सहारा लेती है, लेकिन जिस रफ्तार से हम अपनी प्रकृति के स...
Apr 27, 2009
उदंती.com, अप्रैल 2009
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वर्ष 1, अंक 9, अप्रैल 2009 ***** लोकतंत्र इस धारणा पर आधारित है कि साधारण लोगों में असाधारण संभावनाएं होती हैं। — हेनरी एम...
2 comments:
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