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May 1, 2026

सॉनेटः इस समय

  - अनिमा दास 

इस समय मैं, तुमसे नहीं करती कोई संवाद 

शून्याकाश की मौन कविता में अभी हूँ लीन 

मुझे स्पर्श नहीं करते शब्द-वाण, कटु निनाद 

मैं नहीं हूँ किसी ध्वनि में, न हूँ उसकी अधीन।

 

इस समय मैं,हूँ आबद्ध स्वयं की प्रतिच्छाया में 

सर्वशेष महोदधि में एक क्षुद्र जलकण लवणीय 

लुप्तप्राय मेरा सत्व होने मुक्त अभिशप्त ग्रह से 

होता वेगहीन विस्मृत कर प्राक कथा मोहनीय।

 

इस समय, विष की वर्षा में ज्वलन है अतिशय 

हाँ! अद्य हुआ है श्रीहीन मेरे भाग का वृन्दावन 

हृदय नहीं है यमुना-तट की सुरभि में नृत्यमय 

प्राण-पीयूष हो रहा शुष्क, शून्य हो रहा कानन।

 

इस समय,मयूर-वर्ण व्यथा हो रही अर्ध जीवित  

अंत क्यों नहीं है गतिमय श्वास का, क्यों है प्रथित?


1 comment:

  1. Anonymous06 May

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। बधाई । सुदर्शन रत्नाकर

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