October 06, 2020

उदंती.com, अक्टूबर 2020


वर्ष- 13, अंक -2

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि।
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।। 
-कबीर दास



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9 Comments:

At 08 October , Blogger प्रीति अग्रवाल said...

आदरणीया रत्ना वर्ना जी, आदरणीय काम्बोज भाई साहब, एवम उदन्ती की समस्त टीम को मेरी ओर से एक और सफल अंक प्रकाशन हेतु बहुत बहुत बधाई!...हमेशा की तरह, पढ़ने योग्य उत्तम सामग्री प्राप्त हुई!!
इस सुन्दर मंच पर मेरी कविताओं को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार, आपका प्रोत्साहन मेरी लेखनी को बल देता है!!

 
At 14 October , Blogger Unknown said...

आदरणीय डॉ रत्ना वर्मा मैम पत्रिका प्राप्त करने हेतु जानकारी देने की कृपा करें। आप का प्रयास बहुत सराहनीय है। नेट पर पत्रिका देखी अच्छा कलेवर और जानकारियों के साथ अच्छा कार्य कर रही हैं।
डॉ अरुण कुमार वर्मा 9754128757

 
At 15 October , Blogger रत्ना वर्मा said...

वेब पत्रिका आपके सामने है वर्मा जी... 2008 अगस्त से आरम्भ इस वेब पत्रिका का अवलोकन आप कर सकते हैं।
आपने मेरे कार्य की सराहना की आभारी हूँ। आपका बहुत बहुत धन्यावाद।

 
At 16 October , Blogger रत्ना वर्मा said...

आपका बहुत बहुत आभार और शुक्रिया प्रीति जी

 
At 16 October , Anonymous साधना मदान said...

आदरणीय डाक्टर रत्ना वर्मा जी.....वेब पत्रिका में मुझे (साधना मदान)को शामिल करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। पत्रिका के कलेवर में झांकने पर फिर से कहानी, कविता और लेख एक साथ पढ़ने की चाह जाग उठी है। आपको व उदंती की संपूर्ण टीम को मेरी ओर से बधाई व धन्यवाद।

 
At 16 October , Blogger विजय जोशी said...

अंग्रेजी में कहूं तो आप one person army हैं साहित्य जगत की दो दशक से साहित्य सेवा समर्पित। सो हार्दिक बधाई एवं आभार

 
At 18 October , Blogger प्रगति गुप्ता said...

आप बहुत अच्छा काम कर रही है रत्ना जी...उदंती पत्रिका का हर कॉलम अपने आप में बहुत उत्कृष्ट है। सामग्री चयन करते में जिन बातों का ध्यान रखना चाहिए आप पूरी तरह रखते हो।यही पत्रिका को नए आयाम देता है व भविष्य में शिखर पर पहुंचता है। पत्रिका के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं
प्रगति गुप्ता

 
At 27 October , Blogger Jyotsana pradeep said...

आदरणीया रत्ना वर्मा जी,आदरणीय हिमांशु एवँ उदन्ती से जुड़े सभी लोगों को इतने सुन्दर अंक के लिए हार्दिक बधाई !!पत्रिका का सुन्दर कलेवर और उस पर जगमगाता भीतरी सौंदर्य...हमेशा की तरह लाजवाब !!पत्रिका में कविताएँ, आलेख,व्यंग्य,कहानी,हाइकु,क्षणिकाएँ,सभी बहुत बढ़िया !ढेरों शुभकामनाओं के साथ !!
ज्योत्स्ना प्रदीप
जालंधर (पंजाब )

 
At 04 November , Blogger रत्ना वर्मा said...

इस सराहना के लिए आप सभी सुधी पाठकों का हृदय से आभार धन्यवाद... इस प्रकार की सार्थक समालोचना आगे के अंकों को और बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है...

 

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