July 25, 2017

गीत/ कुण्डलिया छंदः

 कब आओगे घन

- डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

बढ़ते -बढ़ते आज हो गई
उसकी पीर सघन
बाट जोहती रही धरा तुम
कब आओगे घन!

सोचा था महकेंगे जल्दी
गुंचे आशा के
समझाया फिर लाख तू मत गा
गीत निराशा के
बस में नहीं मनाना इसको
बिखरा जाए मन।

उजड़े बाग़-बगीचे सूने
मौसम बदला- सा
तड़की छाती, खेत ,घूमता
किसना पगला- सा
जोड़-तोड़कर चले ज़िंदगी
करता रहा जतन।

उमड़ी ममता कब तक रहती
धरती माँ बहरी
जला हृदय सागर का, उसकी
पीर हुई गहरी
टप-टप बरसे नयन मेघ के
रोया खूब गगन।

बाट जोहती रही धरा फिर
लो घिर आए घन।

 भिगो गई मन
धरती तपती आग -सी, करती हाहाकार,
बादल लेकर आ गए, तब बूँदें दो-चार।
तब बूँदें दो-चार, दे रहे हमें दिलासा,
बरसेंगे हम खूब, रखेंगे तुम्हें न प्यासा।
कलियाँ तजतीं प्राण, भला क्या धीरज धरती,
हुई बहुत बेहाल, विकल है कितनी धरती।। 1

दिनकर देता ताप जब, लेता नहीं विराम,
हरने को संताप, तब, आओ भी घनश्याम।
आओ भी घनश्याम, फूल, कलियाँ हर्षाएँ,
सरसें मन अविराम, मगन हो झूमे गाएँ।
धरा धार ले धीर, गीत खुशियों के सुनकर,
कुछ तो कम हो पीर, लगे मुस्काने दिनकर।। 2   

नन्ही बूँदें नाचतीं, ले हाथों में हाथ,
पुलकित है कितनी धरा, मेघ-सजन के साथ।
मेघ-सजन के साथ, सरस हैं सभी दिशाएँ,
पवन-पत्तियों संग, मगन मन मंगल गाएँ।
अब अँगना के फूल, ठुमककर नाचें कूदें,
भिगो गईं मन आज, धरा संग नन्ही बूँदें।। 3

कठिनाई के सामने, झुके न जिनके माथ,
जोड़े हैं उनको सदा, क़िस्मत ने भी हाथ।।
क़िस्मत ने भी हाथ, बढ़ाकर दिया सहारा,
मंज़िल ने ख़ुद राह, दिखाकर उन्हें पुकारा।
खिले ख़ुशी के फूल, सरस बगिया मुस्काई
सदा हुई निर्मूल, टिकी है कब कठिनाई।। 4 

सम्पर्क:॥-604 , प्रमुख हिल्स, छरवाडा रोड, वापी, जिला- वलसाड (गुजरात) 396191, मो. 9824321053

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष