February 11, 2015

उदंती.com जनवरी- फरवरी 2015

 चित्रः राघव वर्मा
उदंती.com जनवरी- फरवरी 2015           
सबसे जीवित रचना वह है जिसे पढ़ने से प्रतीत हो कि लेखक ने अंतर से सब कुछ फूल सा प्रस्फुटित किया हो। -शरत्चन्द्र 
लघुकथा विशेष
लघुकथा: संचेतना एवं अभिव्यक्ति - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' 
दुआ, नींद  - रमेश बतरा
ज़िंदगी, बेटी का ख़त  - सुकेश साहनी
बीमार, सहयात्री   - सुभाष नीरव
छोटे बड़े सपने, कट्टरपंथी  - रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
टूटी ट्रे, असली मुजरिम    - श्याम सुन्दर अग्रवाल
खेलने के दिन, अनर्थ   - कमल चोपड़ा
बेडिय़ाँ  - डॉ. पूरन सिंह
सच झूठ, हद  - डॉ. श्याम सुंदर 'दीप्ति' 
पहला संगीत   - अखिल रायजदा
 माँ, तोहफा  - प्रेम गुप्ता 'मानी'
रब करदा है सो,  रोशनी  - मुरलीधर वैष्णव
माँ, युग परिवर्तन, मासूम अपराध  - ऋता शेखर 'मधु'
जहर की जड़ें, निर्मल खूबसूरती  - बलराम अग्रवाल
 मर्यादा,  बेखबर   - डॉ. सुधा ओम ढींगरा
मुआयना, आश्वस्त, गम   - हरदर्शन सहगल
अप्रत्याशित, विकल्प - शकुंतला किरण
21वीं सदी का सपना, स्त्री का दर्द  - अमर गोस्वामी
निरुत्त्तर, बोकरा भात  - के. पी. सक्सेना 'दूसरे'
प्रॉब्लम चाइल्ड, सच - शेफाली पाण्डेय 
मेरे अपने, इस बार  - कमलेश भारतीय
अंतहीन सिलसिला, सर्वशक्तिमान, कारण  - विक्रम सोनी
फेलोशिप, स्वाद   - दीपक मशाल
अन्धा, पीड़ान्तर, मूल्यांकन, बेकार  - आलोक सातपुते
सदुपयोग, समय चक्र, दो रुपये का अखबार - बालकृष्ण गुप्ता 'गुरु'
एक सच्ची रिर्पोट, भूकंप पीडि़त  - महेश राजा
भूकंप, बाहर का मोह  - डॉ. करमजीत सिंह नडाला
खलल  - आशीष दशोत्तर
मानव धर्म, दीया तले   - सुरेश शर्मा
कागज की किश्तियाँ, रिश्ते   - डॉ. अशोक भाटिया
भूख, मिट्टी तेल और मेरिट  - रवि श्रीवास्तव
अमंगल, बीस जोड़ी आँखें, मिसाल  - डॉ. शील कौशिक  
फीस, बड़ा होने पर   - गंभीर सिंह पालनी
आवरण चित्र: राघव वर्मा

2 Comments:

सुनील गज्जाणी said...

sabhi sammanit rachnakaaro ko hardik hardik badhai aur shubh kamanye

सुधाकल्प said...

यहाँ अनेक लघुकथाकारों के रचना संसार से परिचित हो बड़ा अच्छा लगा। बधाई है।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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