December 02, 2009

उदंती.com, दिसम्बर 2009


वर्ष 2, अंक 5, दिसम्बर 2009
**************

शालीनता का मोल नहीं लगता, पर उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है।
- लेडी मांटेग्यू
**************
अनकही: छिति जल पावक गगन समीरा...


Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home