December 14, 2008

स्वागत है...

उदंती.com का पांचवा अंक आपके हाथों में है। पत्रिका आप सबके सहयोग से नियमित प्रकाशित हो रही है। लगातार मिल रहे सुझाव तथा मार्गदर्शन से पत्रिका को और अधिक पठनीय बनाने का प्रयास जारी है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यटन, पर्यावरण, समाज, कला, संस्कृति आदि विभिन्न विषयों के साथ संस्मरण, गीत, गकाल, कविता, कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएं आदि का भी समावेश किया जा रहा है।
पत्रिका के प्रत्येक अंक में किसी एक कलाकार की कला- चाहे वह चित्रकला हो, शिल्प कला हो या किसी भी अन्य विधा की कला हो, उदंती.ष्शद्व के विभिन्न पन्नों पर प्रकाशित किया जाता है।

प्रस्तुत अंक से पाठकों की भागीदारी से च्मुझे भी आता है गुस्सा ज् शीर्षक से एक नया स्तंभ आरंभ किया जा रहा है। इस स्तंभ के माध्यम से समाज में फैली अव्यवस्था के उन पहलूओं पर बातचीत करेंगे जिनको अक्सर हम नजरअंदाज करते चले जाते हैं और एक दिन वह नासूर बनकर हमारे जीवन से ऐसे चिपक जाता है कि फिर कोई उपाय नहीं सूझता। आईए मिलकर कोई राह निकालने की कोशिश करें।
सभी स्तंभों के लिए मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचना के साथ अपना संक्षिप्त परिचय और फोटो भी अवश्य भेजें।

रचनाकारों से अनुरोध है कि वे अपनी रचनाएं
udanti.com@gmail.com
अथवा उदंती.com- माटीज गैलरी, जीवन बीमा, मार्ग पंडरी,
रायपुर(छ. ग.) 492004 के पते पर प्रेषित करें।

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

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